प्रेम और समर्पण का पर्व भैया दूज हर्षोल्लास से मनाया गया

0
39

वाराणसी। भाई बहन के अपार प्रेम व समर्पण का प्रतीक पर्व भैया दूज आज पूरे हर्षोल्लास के साथ काशी में मनाया गया। इस दिन बहनें सुबह से व्रत रखकर अपने भाइयों के लंबी उम्र की कामना के लिए गोधन बनाकर आयु चक्र में भटकईया के कांटे छुआती हैं। इसके बाद पूजा समाप्त कर भाई की आरती उतारती हैं।

क्या है मान्यताएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाई दूज के दिन भाई की हथेली पर बहन चावल का घोल लगाती हैं। इसके बाद उस पर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे—धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कहती हैं जैसे ‘गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े’। इसी दिन शाम को बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। माना जाता है कि इस दौरान अगर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे जाए, तो बहुत शुभ है। इसका तात्पर्य है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है।

भाई बहनों के घर पर करते हैं भोजन
मान्यताओं के अनुसार अगर आज के दिन भाई, बहनों के घर पर भोजन करते हैं तो उन्हें यश की प्राप्ति होती है। साथ ही भगिनों यानि भांजियों को अगर दान स्वरूप कुछ भेंट करते हैं तो उनकी सारी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।