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बापू ने दस्तावेजों को जलाकर जौनपुर के लोगों को दी थी ये सौगात

जौनपुर। आजादी के आंदोलन को गति देने के लिए महात्मा गांधी जौनपुर में दो बार आये थे। पहली बार 10 फरवरी 1920 को और दूसरी बार 2 अक्टूबर 1929 को आये थे। जहां उन्होंने भंडारी स्टेशन पर हजारों लोगों को सम्बोधित किया था, साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर रहने का मूल मंत्र भी दिया था। 

बता दे कि महात्मा गांधी जनपद में दो बार आये थें। पहली बार भण्डारी स्टेशन और और दूसरी बार रामेश्वर  सिंह के आवास पर रुके थे। जिले के तमाम सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह की अगुवाई में वहां गए। लोगों ने उनसे जौनपुर आने के लिए निवेदन किया, जिसके बाद 10 फरवरी 1920 को गांधी दुबारा जौनपुर पहुंचे। उनके आने की सूचना पाकर प्रशासन ने विद्यालयों को बंद कर दिया था। उस समय  लगभग बीस हजार जनता राष्ट्रपिता का भाषण सुनने के लिए वहां पहुंची थी। प्लेटफॉर्म पर बने मंच से ही उन्होंने दस मिनट भाषण दिया। इस दौरान बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की बात के साथ, पलो, बढ़ो और पढ़ो का नारा दिया।

वहीं बिमला सिंह ने बताया कि गांधी 2 अक्टूबर 1929 को अपने जन्मदिन के दिन यहां पर आए हुए थे। उन्होंने करीब बीस हजार लोगों को सम्बोधित किया। आगे बताते हुए बिमला कहती हैं कि उस दिन बापू का जन्मदिन था और मेरे बाबूजी ने उनको उपहार स्वरुप जमीं के कागजात दिए थे जो उनके पास गिरवी थे। बापू ने उन सरे कागजातों को यह कह कर जला दिया कि जो जहां रह रहा है वो वही रहे। उसके बाद फिर मेरे बाबूजी ने कभी किसी को घर से बेघर नहीं किये।

बापू एक सभा सम्बोधित कर रहे थे तभी कुछ महिलाओं को उन्होंने अर्द्धनग्न देखा था, जिसके बाद गांधी ने अपने शरीर के ऊपर का कपड़ा निकालकर उन महिलाओं को दे दिया और गांधी ने कभी अपने शरीर के ऊपरी भाग पर कोई कपड़ा नहीं रखा।

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