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गुहार…CM साहब हमने तो कोरोना की लड़ाई में जान लगा दिया, क्या इसका ईनाम यही है? कुछ तो मोहलत दीजिए

ब्यूरो डेस्क। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच कोरोना योद्धाओं ने सरकार का साथ देते हुए अहम योगदान दिया। जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल है। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक बुरी खबर आई है। शासन ने यह आदेश जारी किया है कि जिन पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण हो चुका है, वह 3 दिन के भीतर अपने पुलिस लाइन स्थित आवास को खाली करें, अन्यथा उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस खबर के बाद वर्दी रूपी देवता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

दरअसल उत्तर प्रदेश शासन ने एक आदेश जारी किया है, आदेश में लिखा है कि वैसे पुलिसकर्मी जो पुलिस लाइन के आवास में रह रहे हैं और उनका स्थानांतरण कहीं और है, वह अपने निवास को खाली करें। यह वही कोरोना योद्धा हैं, जिन्होंने लॉक डाउन को पालन कराने के लिए खुद की जान दांव पर लगा दी है। इस खबर के सामने आने के बाद पुलिस कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि, जिस वर्दी को सलाम करते हुए लोग देवता के रूप में पूज रहे थे, उसे उनके ही नुमाइंदे कैसे झुठला सकते हैं। पुलिसकर्मियों की माने तो उनका परिवार जिस जगह रह रहा है वहीं पर उनके बच्चे भी पढ़ रहे हैं इसके साथ ही कई ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिनके माता-पिता का इलाज भी चल रहा है अचानक आए इस आदेश के बाद कमरे को खाली करना नामुमकिन सा लग रहा है।

हालांकि इसमें सत्यता यही है कि शासन ने आदेश जारी किया है और उन्हें 3 दिन के भीतर अपने कमरे को खाली करना है। कोरोना वारियर्स का तमगा लगाएं यह पुलिसकर्मी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इन वर्दी धारियों को यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि अब अगला कदम उन्हें क्या उठाना है। क्योंकि ऐसे कठिन समय पर पुलिस वालों को या अन्य किरायेदारों को कोई कमरा किराए पर देगा नहीं। उसके लिए पुलिस सत्यापन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही कोरोना के खतरे को देखते हुए कोई कमरा किराए पर देने को तैयार नहीं है। यह पुलिसकर्मी जाए तो जाए कहां । अब यह पुलिसकर्मी बेघर होने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके बड़े अधिकारियों की तरफ से यह आदेश जारी हुआ है। इस आदेश का पालन करना इन वर्दी धारियों की मजबूरी है, यही संविधान में लिखा है।

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