MAU: डीएवी में आयोजित हुआ 27वां राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, शेफाली-वैष्णवी को मिला प्रथम स्थान

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मऊ। जिले के डीएवी इंटर कॉलेज में 27वें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के तहत जनपद स्तरीय परियोजना प्रस्तुतीकरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें विषय ‘स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ राष्ट्रीय विज्ञान तकनीक एवं नवाचार’ पर बाल वैज्ञानिकों ने अपना प्रोजेक्ट तैयार किया। प्रतियोगिता में सीनियर संवर्ग में शेफाली पाण्डे और वैष्णवी त्रिपाठी की टीम को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इन छात्राओं ने ‘Waste to Welfare’ थीम पर अपना प्रोजेक्ट बनाया था। जिसके तहत कचरा प्रबंधन के साथ ही रोजगार के अवसर भी दिखाए गए हैं।

बता दें कि स्कूली स्तर के बच्चों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की तरफ से राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जाता है। डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से 240 बच्चों ने प्रतिभाग किया। जूनियर संवर्ग से दो बच्चे और सीनियर संवर्ग से 2 बच्चे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए चयनित किए गए। निर्णायक मंडल के सदस्यों में त्रिभुवन सिंह (पूर्व प्रधानाचार्य), शर्मिष्ठा गुप्ता, डॉक्टर भूपेंद्र वीर सिंह, दीनदयाल राय, देवानंद, बृजेश कुमार राय, शरद कुमार पांडेय ने अंकों के आधार पर निर्णय किया। सीनियर संवर्ग में कुमारी शेफाली पांडेय (अमृत पब्लिक स्कूल, मऊ) को प्रथम स्थान एवं कुमारी दामिनी वर्मा (सोनी धापा बालिका इंटर कॉलेज, मऊ) को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। जूनियर संवर्ग में छवि भारद्वाज (देव पब्लिक स्कूल, सहादतपुरा) और अनूप (उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ढठवल) के छात्रों ने अपना अपना परचम लहराया। नगर पालिका के अध्यक्ष मोहम्मद तय्यब पालकी ने चयनित बाल वैज्ञानिकों को पुरस्कृत किया और उनके मंगलमय भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ आर एम मिश्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों  से बच्चों में वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास होता है। आधुनिक तकनीक के जरिए ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा सकेगा। युवा वैज्ञानिकों को यह एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहां वह अपने शोध कार्य को प्रदर्शित करके अपने वैज्ञानिक प्यास को तृप्त कर पाते हैं। बाल वैज्ञानिक अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं को जानें, समझें तथा वैज्ञानिक विधि से समस्याओं को हल करने की दिशा में सीखने का प्रयास करें। देश के भविष्य निर्माण में वैज्ञानिक ज्ञान के महत्वपूर्ण भूमिका को समझाते हुए संवेदनशील बनें एवं जवाबदेह नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ें। युवा वैज्ञानिकों को चेतना का निर्माण करना, विज्ञान विधि को समझना, आंकड़ों का संग्रह करके प्रायोगिक विश्लेषण  द्वारा निष्कर्ष पाने की प्रक्रिया आत्मसात कर पाते हैं।